आज़ादी मुबारक हो

पसंद न था

खेतों में टमाटर प्याज़ उगाना

हैसियत में  नहीं

आज बाज़ार से उन्हें ख़रीदना

कभी सोचते थे

दुनिया को इशारों पर नचाओगे

आज सोचते हो

बिना प्याज़ टमाटर के घर में क्या बनाओगे

तुम्हे आज़ादी मुबारक हो

 

तुम किश्तों में कटते हो

कभी हिस्सों में जुड़ते हो

चाल है तुम्हारी नवाबों वाली

जाल में फंसे हो EMI वाली

तुम्हें भी आज़ादी मुबारक हो

 

गाँव के साथ तेवर भी छोड़ दिए

कड़ी धुप में अटल रहने वाला सर

आज AC कमरे में झुका दिए

भूख मिटाने के सपने देखने  वाले

आज दो वक़्त के आगे तुमने घुटने टेक दिए

तुम्हे भी आज़ादी मुबारक हो

 

कहीं कांग्रेस ने फैलाया जाल

तो कहीं माओवादियों ने किया बूरा हाल

प्रेमिका के साथ long drive का सोंचा

तो traffic jam और खड्डों ने टोका

अकेली बेटी को बहार भेजने से डरते हो

जवान बेटे को गाड़ी देने से डरते हो

 

कभी सिनेमा घर के बढ़ते rates

तो कभी auto-rickshaw के बढ़ते fares

बच्चों की फीस हो

या दिवाली में सिलवानी नयी कमीज़ हो

पेट्रोल के बढ़ते दाम

घर का बढ़ता किराया

सब ने मिलकर तुम्हे बंधी बनाया

ख़्वाबो के महल में आज़ाद रहने वाल़े

आज तुम्हे आज़ादी मुबारक हो

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One thought on “आज़ादी मुबारक हो

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